यह कहानी है छिंदवाड़ा जिले के तामिया विकासखंड के ग्राम सिधौली निवासी 57 वर्षीय श्री अन्तलाल भारती की। विशेष पिछड़ी भारिया जनजाति से आने वाले श्री अन्तलाल का जीवन लंबे समय तक संघर्षों से भरा रहा। परिवार के भरण-पोषण के लिए उन्हें गांव से पलायन कर दूसरे जिलों में मजदूरी की तलाश में जाना पड़ता था। कृषि मजदूरी और वनोपज ही परिवार की आय के प्रमुख साधन थे। अन्तलाल भारती का परिवार बड़ा है।
पत्नी सविता सहित उनकी चार बेटियां और एक पुत्र परिवार का हिस्सा हैं। सीमित आमदनी में पूरे परिवार का भरण-पोषण करना उनके लिए हमेशा चुनौती रहा। परिवार के पास अन्त्योदय राशन कार्ड था, लेकिन स्थायी और सुरक्षित आवास का सपना अब तक अधूरा था।
खास बातें
- आवास निर्माण के लिए 2 लाख रुपये की सहायता प्राप्त हुई और स्वयं मजदूरी कर आवास निर्माण करने पर 21 हजार रुपये की सहायता भी मिली।
- स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 12 हजार रुपये की सहायता से परिवार के लिए पक्का व्यक्तिगत शौचालय बनाया गया।
- इससे परिवार को भविष्य में पात्रता के अनुसार 5 लाख रुपये तक के निःशुल्क उपचार का स्वास्थ्य सुरक्षा कवच मिल गया है।
बारिश में टपकती छत और कच्ची दीवारों का दर्द - पीएम जनमन योजना का लाभ मिलने से पहले अन्तलाल अपने परिवार के साथ मिट्टी की दीवारों वाले कच्चे मकान में रहते थे। बरसात का मौसम उनके लिए परेशानी लेकर आता था। बारिश का पानी घर में प्रवेश कर जाता, जिससे कपड़े, अनाज और घरेलू सामान खराब हो जाते थे। बेटियों का खुले में शौच के लिए जाना और भी कष्टप्रद था।
उनकी सुरक्षा की चिंता रहती थी। उनके समुचित पौषण की भी चिंता बनी रहती थी। काम की तलाश में गांव से बाहर जाना पड़ता था। परिवार से दूर रहकर मजदूरी करना उनकी मजबूरी थी। लेकिन फिर प्रधानमंत्री जनमन अभियान के माध्यम से उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत हुई।
पक्का घर बना, तो पूरा हुआ बरसों पुराना सपना - वर्ष 2023-24 में प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत अन्तलाल भारती को पक्के आवास की स्वीकृति मिली। आवास निर्माण के लिए 2 लाख रुपये की सहायता प्राप्त हुई और स्वयं मजदूरी कर आवास निर्माण करने पर 21 हजार रुपये की सहायता भी मिली।
जिस परिवार ने वर्षों तक मिट्टी की दीवारों वाले घर में बरसात की चिंता के साथ जीवन बिताया था, उसके सामने अब पक्का, लेंटर वाला मकान खड़ा था। अन्तलाल कहते हैं— “पक्का घर मेरे लिए सिर्फ मकान नहीं है, यह मेरे परिवार की सुरक्षा और मेरे जीवन की सबसे बड़ी खुशी है।
अब बारिश में न पानी घर में आता है और न ही अनाज और कपड़े खराब होने की चिंता रहती है।” एक-एक योजना ने आसान किया जीवन - अन्तलाल भारती के परिवार को प्रधानमंत्री जनमन अभियान के तहत अन्य शासकीय योजनाओं के माध्यम से कई सुविधाओं का लाभ मिला। खाद्यान्न पात्रता के तहत परिवार को प्रतिमाह 20 किलो राशन मिल रहा है। इससे परिवार के लिए भोजन की व्यवस्था आसान हुई है।
उज्ज्वला गैस कनेक्शन मिलने से लकड़ी के चूल्हे और धुएं से होने वाली परेशानी कम हुई है। विशेषकर बारिश के दिनों में गीली लकड़ी से खाना बनाने की समस्या से परिवार को राहत मिली है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 12 हजार रुपये की सहायता से परिवार के लिए पक्का व्यक्तिगत शौचालय बनाया गया। अब परिवार को खुले में शौच के लिए जंगल या मैदान में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
नल-जल योजना के माध्यम से घर तक पानी की सुविधा उपलब्ध हुई है, जिससे दैनिक जीवन में सुविधा बढ़ी है। आयुष्मान भारत योजना के तहत परिवार के सदस्यों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं। इससे परिवार को भविष्य में पात्रता के अनुसार 5 लाख रुपये तक के निःशुल्क उपचार का स्वास्थ्य सुरक्षा कवच मिल गया है।
वहीं भारिया पोषण आहार योजना के तहत अन्तलाल की पत्नी सविता भारती को प्रतिमाह 1,500 रुपये की पोषण आहार अनुदान राशि बैंक खाते में प्राप्त होती है, जिससे पत्नी और बेटियों के समुचित पोषण की व्यवस्था हो जाती है।
सम्मान और आत्मविश्वास की नई अनुभूति - पीएम जनमन आवास और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ केवल अन्तलाल के घर की दीवारों को पक्का करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे उनके परिवार के जीवन में सुरक्षा, सुविधा और आत्मविश्वास भी आया। योजनाओं का लाभ समय पर लेकर उनका उपयोग करने की जागरूकता ने अन्तलाल भारती के परिवार को एक अलग पहचान दी।
उनके नव-निर्मित जनमन आवास में मध्यप्रदेश के महामहिम राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल द्वारा वर्ष 2024 में अंतलाल के परिवार के साथ भोजन किया जाना उनके जीवन का अत्यंत भावुक और यादगार पल रहा। जिस घर में कभी बारिश का पानी प्रवेश कर जाता था, उसी घर में राज्यपाल का परिवार के साथ भोजन करना अन्तलाल के लिए गर्व और सम्मान का क्षण बन गया।
पलायन रुका, अपने गांव में ही मिली आगे बढ़ने की उम्मीद - आज अन्तलाल भारती अपने परिवार के साथ पक्के मकान में सुरक्षित जीवन जी रहे हैं। कृषि मजदूरी और वनोपज से होने वाली आय के साथ उन्हें शासकीय योजनाओं से मिली सहायता ने परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में सहारा दिया है। अब उन्हें रोजगार की तलाश में अन्य जिलों में नहीं जाना पड़ता है।
कभी जो परिवार बारिश, कच्चे मकान और रोजी-रोटी की चिंता से जूझता था, आज उसी परिवार के पास पक्का घर, खाद्यान्न सुरक्षा, गैस कनेक्शन, शौचालय, नल-जल सुविधा, स्वास्थ्य सुरक्षा और पोषण सहायता जैसी सुविधाएं हैं, जो स्वयं "बदलाव की कहानी" कह रही हैं।



